सञ्चालन
तीन वर्टीकल
1. अंतिम मील कनेक्टिविटी एवं परियोजनाओं का संवर्धन (औग्मेंटेशन)
- रेल द्वारा कार्गो/माल की निकासी के हिस्से को बढ़ाना |
- बंदरगाहों को एवं बंदरगाहों से अंतिम मील कनेक्टिविटी को बढ़ाना, परिवर्तन करना, सुधारना |
- बंदरगाहों/पोर्ट्स द्वारा परियोजनाओं का वित्त पोषण क्योंकि वे एकमात्र लाभार्थी हैं |
2. बंदरगाहों/पोर्ट्स पर आतंरिक रेल सिस्टम का संवर्धन एवं संचालन व रखरखाव
- मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ बनाना जिससे की समर्पित कार्गो का तेजी से निकास हो सके |
- बदलाव के समय एवं उपलब्धि/कार्य निष्पादन के मानकों में वृद्धिशील सुधार |
- श्रम शक्ति में वृद्धिशील कटौती और उत्पादकता में सुधार |
3. आतंरिक इलाकों से कनेक्टिविटी की परियोजनाएं
- बहुलाभार्थी कनेक्टिविटी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर समानाधिकृत भागीदारी : सालेगाँव-पारादीप, इंदौर-मनमाड़ इत्यादि |
- रेलवेज के सहभागी मॉडल का लाभ उठाना : संयुक्त उद्यम मॉडल (JV), गैर सरकारी रेलवे (नॉन-गवर्नमेंटल रेलवे) मॉडल इत्यादि |